Quarantined Zindagi | Lockdown Hindi Poem

Last updated on May 22nd, 2021 at 06:41 am

आज कुछ सुकून है
शांति थोड़ी ज्यादा है
गाड़ियों का धुआँ कम है
सड़क पर सन्नाटा ज्यादा है

बाजार में चहल पहल कम है
थाली चमचों का शोर ज़्यादा है
ऑफिस का बोझ कम है
घर पर काम ज्यादा है

असली जानकारी कम है
अफवाहें थोड़ी ज्यादा हैं
अनपढ़ को ज्ञान कम है
पर ज्ञानी मूर्ख ज्यादा हैं

लिखाई पढाई कम है
दिखावा कहीं ज्यादा है
बीमारी का असर कम है
इंस्टा स्टोरी का ज्यादा है

Quarantine कुछ कम है
प्लेफार्म पर भीड़ ज्यादा है
जागरूकता कम है और
लापरवाही बहुत ज्यादा है

पराग पल्लव सिंह

Behind This Poem:
Everybody is observing a lot during this lockdown. I also did the same. There were different types of observation around me which I compiled in the poem “Quarantined Zindagi”. This Hindi poem clearly depicts what’s going over the news c, on Twitter Wars, real ground work, and many other things.

Chalte Chalte:
“Aaj Kuch Sukoon Hai” were the words that I listened to my mum, saying perfectly, on the first day of lockdown while she was watching the silent scenery on the Roadside.

3 thoughts on “Quarantined Zindagi | Lockdown Hindi Poem”

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